नागरीप्रचारिणी सभा का प्रतीक-चिह्न

नागरीप्रचारिणी सभा, काशीस्थापना 1893 · Est. 1893

PL. · सभा के प्रकाशन

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सभा के प्रकाशन — पुस्तकें, पत्रिकाएँ, पुनर्मुद्रणBooks and journals published by the Sabha since 1893

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Ramanand ki Hindi Rachnaye

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Description

मध्ययुग के धार्मिक इतिहास में रामानंद वह विभूति थे जिन्होंने अंधविश्वास और रूढ़ि की प्राचीरें गिरा दीं। हिंदी के पहले डी.लिट्. डॉ. पीतांबरदत्त बड़थ्वाल ने विभिन्न हस्तलेखों — सभा में सुरक्षित प्रतियों सहित — से उनकी हिंदी रचनाएँ एकत्र कीं: सिखों के आदि ग्रंथ में संगृहीत पद समेत उनके पद, ‘ज्ञान लीला’, ‘ज्ञान तिलक’, ‘योग चिंतामणि’ और ‘राम रक्षा’। बड़थ्वाल की भूमिका बताती है कि जोगी-परंपरा से रामानंद को जो शिक्षा मिली, वही उन्होंने कबीर को दी।

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