Description
मध्ययुग के धार्मिक इतिहास में रामानंद वह विभूति थे जिन्होंने अंधविश्वास और रूढ़ि की प्राचीरें गिरा दीं। हिंदी के पहले डी.लिट्. डॉ. पीतांबरदत्त बड़थ्वाल ने विभिन्न हस्तलेखों — सभा में सुरक्षित प्रतियों सहित — से उनकी हिंदी रचनाएँ एकत्र कीं: सिखों के आदि ग्रंथ में संगृहीत पद समेत उनके पद, ‘ज्ञान लीला’, ‘ज्ञान तिलक’, ‘योग चिंतामणि’ और ‘राम रक्षा’। बड़थ्वाल की भूमिका बताती है कि जोगी-परंपरा से रामानंद को जो शिक्षा मिली, वही उन्होंने कबीर को दी।




Reviews
There are no reviews yet.