नागरीप्रचारिणी सभा का प्रतीक-चिह्न

नागरीप्रचारिणी सभा, काशीस्थापना 1893 · Est. 1893

PL. · सभा के प्रकाशन

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नागरीप्रचारिणी सभा, काशीस्थापना 1893 · EST. 1893

नागरी का आवरण

नागरी

Nagari

नागरीप्रचारिणी सभा का मुखपत्र

₹340डाक-व्यय सहित · पूरे भारत में

1

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पुस्तक के बारे मेंAbout the book

जिल्द
पेपरबैक
पृष्ठ
143
आकार
9.4 × 7.3

नागरीप्रचारिणी सभा के नए मुखपत्र ‘नागरी’ का प्रवेशांक, जिसके जल में काशी का प्रतिबिंब झिलमिलाता है। काशी और नागरी को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता — यह अंक इसी सचाई का विनम्र अनुमोदन है और शब्दों के ज़रिए काशी के अमरत्व के अनेक आयामों को छूता है। प्रधान संपादक राजेश्वर आचार्य हैं; धरोहर खंड में राय कृष्णदास का निबंध भी शामिल है। इसके साथ सभा अपनी सर्जनात्मक सक्रियता के नए अध्याय में प्रवेश करती है।

• बनारस की रामलीलाओं का जादू  • सकट मोचन संगीत समारोह का वैभव • देवदीपावली की सुषमा • घाटवॉक की समकालीनता • विंध्य के साथ काशी का रिश्ता • काशी की पत्रकारिता का अभय • काशी के संस्कृत विद्यालयों की गाथा • बनारसियत का तत्व चिंतन • मूर्धन्यों के अनुभव और युवता की ऊर्जा • परंपरा की वस्तु और आधुनिकता का शिल्प • गहराई, वैविध्य, मौन, हल्ला, उत्सव और एकांत एक जिल्द में • काशी के मुहावरे में काशी का सौंदर्यबोध •

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