नागरीप्रचारिणी सभा का प्रतीक-चिह्न

नागरीप्रचारिणी सभा, काशीस्थापना 1893 · Est. 1893

PL. · सभा के प्रकाशन

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सभा के प्रकाशन — पुस्तकें, पत्रिकाएँ, पुनर्मुद्रणBooks and journals published by the Sabha since 1893

नागरीप्रचारिणी सभा, काशीस्थापना 1893 · EST. 1893

नागरीप्रचारिणी पत्रिका का आवरण

नागरीप्रचारिणी पत्रिका

Nagaripracharini Patrika

संपादक : प्रोफे़सर राजकुमार

₹420डाक-व्यय सहित · पूरे भारत में

1

उपलब्ध

साथ में पोस्टकार्ड जोड़ें13 संग्रह · ₹30 से

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पुस्तक के बारे मेंAbout the book

जिल्द
पेपरबैक
पृष्ठ
434
आकार
9.6 × 6.3

नागरीप्रचारिणी पत्रिका हिंदी की सबसे प्रतिष्ठित शोध-पत्रिकाओं में रही है — आचार्य शुक्ल के अनेक निबंध पहले-पहल इसी में छपे। लंबे अंतराल के बाद आया यह नवांक उस ऐतिहासिक उत्तराधिकार की रक्षा करते हुए पत्रिका को अपने समय की बौद्धिकता और अनुसंधान का मंच बनाने का संकल्प है — जहाँ एकांत अध्यवसाय के साथ कल्पनाशीलता, नवीनता और साहस के लिए भी जगह हो।

यह पत्रिका हिंदी की अपराजेय बौद्धिकता का स्मारक है. पुनर्नवांक अपनी गौरवशालिनी परंपरा के प्रति विनम्र प्रणति.

मूल्य

इस अंक की एक प्रति: तीन सौ रुपये

संस्थाओं के लिये चार सौ पचास रुपये

वार्षिक सदस्यता: पाँच सौ रुपये (डाक खर्च सहित)

संस्थाओं के लिये: आठ सौ रुपये (डाक खर्च सहित)

विदेश के लिये: सत्तर डॉलर

आजीवन सदस्यता: दस हज़ार रुपये

सदस्यता के लिए संपर्क करें : 9565101828

इस अंक के लेखक- उदयन वाजपेयी, माधव हाड़ा, ब्रजेंद्रकुमार सिंघल, नवीन प्रकाश सिंह, रवि प्रकाश, शुभनीत कौशिक, अमनदीप वशिष्ठ, विक्रम कुलकर्णी, रमण सिन्हा, चाँदनी कुमारी, धनंजय सिंह, संजय कुमार, रमाशंकर सिंह, पंकज पराशर, सैय्यद शाहिद अशरफ, तृप्ति श्रीवास्तव, अंबिकादत्त शर्मा, अभय दुबे, अरुण मिश्र, गरिमा श्रीवास्तव, विनोद तिवारी, दलपत राजपुरोहित

आवरण: मनीष पुष्कले

संपादक : राजकुमार

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