

नागरीप्रचारिणी सभा, काशीस्थापना 1893 · EST. 1893

चिंतामणि भाग-2
Chintamani, Part Two
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
₹150डाक-व्यय सहित · पूरे भारत में
उपलब्ध
साथ में पोस्टकार्ड जोड़ें13 संग्रह · ₹30 से
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पुस्तक के बारे मेंAbout the book
- जिल्द
- हार्डकवर
- पृष्ठ
- 197
- आकार
- 8 × 5
इस खंड में आचार्य शुक्ल के तीन लंबे आलोचनात्मक निबंध हैं — ‘काव्य में प्राकृतिक दृश्य’, ‘काव्य में रहस्यवाद’ और ‘काव्य में अभिव्यंजनावाद’। भारतीय और पश्चिमी साहित्यशास्त्र तथा दर्शन के गहरे अध्ययन पर टिके ये निबंध शुक्लजी की रसवादी दृष्टि की धार दिखाते हैं — व्यर्थ के शब्दाडंबर का खंडन और लोकहितकारी साहित्यधारा की प्रतिष्ठा। पूरी हिंदी आलोचना की आधारशिला माने जाने वाले ये निबंध नागरीप्रचारिणी ग्रंथमाला में प्रकाशित हैं।



