Description
जयशंकर प्रसाद का महाकाव्य ‘कामायनी’ जल-प्लावन के बाद मनु द्वारा मानवीय सृष्टि के नए आरंभ की कथा है। अपने आमुख में प्रसाद बताते हैं कि शतपथ ब्राह्मण, छांदोग्य उपनिषद, ऋग्वेद और भागवत में बिखरे मनु-श्रद्धा-इड़ा के संदर्भों को उन्होंने इतिहास और रूपक दोनों रूपों में ग्रहण किया — श्रद्धा (हृदय) और इड़ा (बुद्धि) के बीच मनु (मन) की यात्रा के रूप में, जो ‘मनुष्यता का मनोवैज्ञानिक इतिहास’ बन जाती है। छायावाद की यह शिखर कृति बड़े आकार के इस हार्डकवर संस्करण में।




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