नागरी प्रचारिणी सभा

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पंच परमेश्वर और ईश्वरीय न्याय

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Kashisth : Kashi Par Ekagra Nibandh

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Description

आजकल बनारस की धूम है. बनारस को जान लेने की ललक भी ख़ूब है. जो लोग पहले से इस महान सभ्यता को जानते थे, वे भी एक बार फिर से इसे पहचानने की कोशिश कर रहे हैं.
यह शहर कभी मंद नहीं हुआ, कहीं रुका नहीं, एक ज़िद्दी अटूट लय में चलता रहा.
इसकी अपराजेय निरंतरता ने संसार को विस्मय में डाल रखा है. विद्वान इसकी व्याख्या करते हैं, साधु इसके चप्पे-चप्पे में बिखरे सार को गह लेना चाहते हैं, रसिक खोजते हैं इसका रस; जो इसके नाम में है, रूप में है और गुण में भी है.
काशी के भिन्न-भिन्न आयामों पर केंद्रित एक पुस्तक के ज़रिए नागरीप्रचारिणी सभा ने भी अपने छंद में काशी के गुणगान का संकल्प लिया है. पुस्तक तैयार हो गई है. नाम है : काशीस्थ (काशी पर एकाग्र निबंध). काशीस्थ का मतलब काशी में रहनेवाला, काशी का, काशी में लीन. 384 पृष्ठों और 17 बाकमाल निबंधों की इस पुस्तक को काशी ही नहीं, किसी भी शहर से प्यार करनेवाला व्यक्ति अपनी शेल्फ़, पढ़ने की टेबल, झोले और दिल में रखना चाहेगा. पुस्तक में शामिल सभी निबंध दुनिया की निगाह और सहृदय पाठकों के चित्त से दूर रहे आए हैं. इसलिए भी यह किताब बहुत ताज़ा और ज़रूरी बन पड़ी है.
नए वर्ष के पहले दिन, यानी आज, यानी अभी से इस पुस्तक की प्री-बुकिंग शुरु हो रही है. आप भी इसे अभी ही बुक करा लीजिए. सृजन और पुनर्निर्माण के विभिन्न मोर्चों पर व्यस्त सभा की आर्थिक मदद तो होगी ही, आप भी इस ख़ूबसूरत किताब को पाकर कम समृद्ध नहीं होंगे.
हमारे विक्रय प्रभारी शाश्वत त्रिपाठी (95651 01828) को फ़ोन कीजिए, पैसे जमा कीजिए, पता लिखवाइए और आनेवाली 15 जनवरी से इस पुस्तक को पढ़ने के लिये तैयार हो जाइए.
आप हैं तो हम हैं.

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