नागरी प्रचारिणी सभा

सास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ

आचार्य रामचंद्र शुक्ल कृत 'हिंदी सहिया का इतिहास पर एकाग्र बातचीत

वक्ता : विश्वनाथ त्रिपाठी, अशोक वाजपेयी, प्रोफ़ेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल और प्रोफ़ेसर रामेश्वर राय

संध्या-वंदन

नागरीप्रचारिणी सभा में काशिराज द्वारा संध्या-वंदन।
शुक्रवार की शाम हिंदी भाषा, साहित्य और देवनागरी लिपि के सबसे पुराने आँगन नागरीप्रचारिणी सभा में एक सदी पुराना समय फिर से जीवित हो उठा, जब काशिराज परिवार के प्रतिनिधि श्री अनंत नारायण सिंह अपने लाव-लश्कर और राजपरिवार के सदस्यों के साथ वर्षा के कारण हाथियों की बजाय कार पर सवार होकर वहाँ पधारे और सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल के कक्ष में लगभग एक घंटे तक संध्यावंदन भी किया.
पिछले 125 सालों से प्रतिवर्ष काशीनरेश नाटीइमली मैदान के विश्वप्रसिद्ध लक्खी मेले भरत मिलाप में शामिल होने के बाद संध्यावंदन के लिए नागरीप्रचारिणी सभा में पधारते रहे हैं. महाराज के पूजापाठ के लिए सभा के प्रधानमंत्री का कक्ष उपयोग में लिया जाता है. यह परंपरा एक सदी पुरानी है. हाल के वर्षों में कोरोना महामारी और मुक़दमों के कारण इस परिपाटी में व्यवधान आ गया था; लेकिन पिछले बरस ख्यात रंगनिर्देशक और कवि व्योमेश शुक्ल के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद यह परंपरा नए उत्साह के साथ फिर से शुरू हुई है.
संध्यावंदन के उपरांत सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने तिलक लगाकर महाराज का स्वागत किया और उन्हें सभा द्वारा प्रकाशित पुस्तकों—हिंदी साहित्य का इतिहास, कविता क्या है, पंच परमेश्वर और ख़ुसरो की हिंदी कविता की प्रतियाँ भेंट कीं. महाराज जी ने भी व्योमेश शुक्ल को काशिराज न्यास द्वारा प्रकाशित रामचरितमानस की प्रति और सगुन की राशि भेंट की.
राजपरिवार के स्वागतार्थ श्री दुर्गा प्रसन्ना और पार्टी का शहनाई वादन हुआ. इस अवसर पर सभा के कार्यकर्ताओं के साथ उपमहानिरीक्षक (सीआरपीएफ ) श्री राकेश सिंह भी उपस्थित थे. सभा परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया था और राजपरिवार के हाथी—भोला, धनराज, चंचल, चंचला और लक्ष्मी प्रातःकाल से ही सभा-परिसर में वृक्षों की पत्तियों और डालियों का नाश्ता कर रहे थे; लेकिन घनघोर बरसात के कारण काशीराज परिवार उन पर सवार होने की बजाय कार से लीला-स्थल और नागरीप्रचारिणी सभा पहुँचे.

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